Moral Story Hindi - मोरल स्टोरी हिंदी ?

नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको जीवन से जुड़ी हुई एक कहानी को बताने जा रहा हूं जो कई अर्थों में आपके लिए एक मोटिवेशन का काम करेगी कहानी के अंत एक moral story hindi में है जो हम सबके लिए एक अनमोल संदेश देती है जिसे अपने जीवन में हम सब को लागू करना चाहिए तो आइये कहानी शुरू करते हैं।


Moral Story Hindi

Moral Story Hindi - कल की चिंता क्यों करना?

यह कहानी एक भारत में रहने वाले सेठ की है जो बहुत ज्यादा अमीर होता है उसकी अमीरी का आलम यह है की   जब भी वह दुकान पर होता है या दुकान पर बैठा होता है तो खुद कोई भी काम नहीं करता उसके सारे काम के लिए अनेको अलग अलग नौकर होते हैं जो दिन भर उसके लिए काम करते रहते हैं  और सेठ  मजे से अपनी जिंदगी गुजार रहा होता है क्योंकि सेठ के पास करने के लिए कोई काम नहीं होता है इसलिए वह दिन में दुकान पर आता और बैठा रहता, खाता पीता और फिर घर चला जाता। घर पर वह सेठानी और बच्चों के साथ ख़ुशी पूर्वक समय व्यतीत करता। इस तरह सेठजी का जीवन बिना किसी परेशानी के चलता रहा। 

एक दिन की बात है की वह अपने दुकान पर बैठे बैठे सोचता है की मेरे पास इतना काम है और उसको करने के लिए ढेर सारे नौकर हैं चलो यह देखतें हैं की मैंने अब तक कितने पैसे कमा लिए हैं। इसलिए वह अपने मुनीम को बुलाता है और कहता है की मुझे यह बताओ की सभी व्यवसाय से मिलाकर कितनी कमाई होती है और मेरे पास कितना धन इकट्ठा हो गया है। 

मुनीम कहता है सेठ जी मैं आपको कल तक सभी मांगी गयी जानकारी की रिपोर्ट देता हूँ यह कहकर मुनीम चला जाता है। 

अगले दिन सेठ जब दुकान पर आता है तो मुनीम को बुलाकर पूछता है की मैंने कल जो जानकारी मांगी थी उसकी रिपोर्ट तैयार हो गयी है तो लेकर आओ मुनीम कहता है की सेठजी मैंने सभी जानकारी प्राप्त कर ली है। 

सेठ अचम्भे से पूछता है की बिना कागज़ रिपोर्ट के मुझे कैसे मालूम पढ़ेगा की आज तक मेरे पास कितना  धन अर्जित हुआ है तभी मुनीम कहता है, सेठजी पूरी रिपोर्ट तो मैं आपको १५ दिन में बनाकर दे पाउँगा क्योंकि आपके पास अनेको काम चल रहें हैं लेकिन मैं आपको यह अभी बता सकता हूँ की आपके पास अभी तक कितना धन इकट्ठा हो चुका है। 

सेठजी उत्सुकतापूर्वक तुरंत पूछतें हैं की मुनीमजी मुझे जल्दी से बताएं तब मुनीम सेठजी से कहता है की आपके पास अभी तक इतना धन इकट्ठा हो चुका है की अगले सात पीढ़ी तक को किसी प्रकार काम करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी और आपकी पीढ़ियां बैठ कर आराम से खाएंगी। इसलिए सेठजी आपको ज़्यादा खुश होना चाहिए। 

सेठजी यह सुनकर बहुत प्रसन्न होतें हैं और मुनीम को १५ दिन में रिपोर्ट बनाने के लिए कहतें हैं। मुनीम चला जाता है और सेठजी फिर सोचने लगतें हैं की मेरी सात पीढियाँ तो बैठ कर खाएंगी यह तो बहुत अच्छा है लेकिन अगली पीढ़ी यानी आने वाली आठवीं पीढ़ी का क्या होगा। उसके लिए तो धन बचेगा ही नहीं तो फिर वह क्या करेंगे ? वह सब अपना जीवन यापन कैसे करेंगे ?

इस तरह के सवालों से अब सेठजी का मन उदास हो गया और सेठजी काफी विचलित होने लगे। शाम होने से पहले ही वह घर को चल दिए और रास्ते भर यही उलझन में रहने लगे और घर पहुँच कर और भी ज़्यादा उदास हो गए। 

इससे पहले सेठजी जब भी घर पहुँचते थे तो ख़ुशी पूर्वक सेठानी के साथ समय व्यतीत करते थे लेकिन आज वह बहुत उदास थे और सेठानी से भी बात नहीं की। 

सेठानी ने सेठ जी से काफी पूछने पर भी कुछ नहीं बताया और बिना भोजन किये सो गए यह क्रम कई दिनों तक चलता रहा। एक दिन सेठानी ने ज़िद पकड़ ली की आप अपनी परेशानी का कारण मुझे बताएं तब उन्होंने सभी परेशानी को बतलाया। सेठानी ने कहा इसके लिए मेरे पास एक उपाय है। सेठजी तुरंत बोले मुझे जल्दी से बताओ सेठानी ने कहा की कुछ दूरी पर एक बाबा जी आये है और सभी की समस्याओं का निदान भी करतें हैं। आपको भी अपनी इस समस्या के लिए उनके पास जाना चाहिए। सेठजी को सेठानी का यह सुझाव समझ में आ गया और इसके लिए सेठजी तुरन्त तैयार हो गए और बोले की अगले दिन दुकान नहीं जाऊंगा बल्कि सबसे पहले उन बाबा से मिलने जाऊँगा। 

अगले दिन सुबह सेठजी बाबा से मिलने के लिए लिए बाबा के स्थान पर पहुंचते हैं। वहां पर कुछ समय इंतज़ार करने पर उनका नम्बर आता है तो बाबा के पास जाकर अपनी समस्या का कारण बतातें हैं और पूछतें हैं की बाबा मुझे यह बताएं की मेरी आठवीं पीढ़ी का क्या होगा ? 

सेठजी बाबा से कहतें है की जो भी आप पूजा पाठ का खर्चा होगा मैं वह सब करूँगा, खर्चे की किसी प्रकार की कोई चिंता नहीं है बस आप मेरे समस्या का निवारण कर दें।  

बाबा मुस्करातें हैं और कहतें हैं ठीक है मैं आपकी समस्या का निवारण कर दूंगा लेकिन उसके लिए आपको एक कार्य दूंगा जिसे आपको स्वयं करना होगा तभी आपकी समस्या का निवारण हो पायेगा। 

सेठजी बहुत खुश होते है और वादा करतें हैं की जो भी आप कार्य बताएँगे मैं उसको स्वयं करूँगा, आप केवल मेरी समस्या का निवारण कर दें। 

बाबा बतातें है की पास के ही गांव में सबसे आखिरी एक झोपडी है जो बहुत जर्जर अवस्था में है और उस झोपडी में एक बूढी अम्मा अकेले रहती है उसके पास कोई नहीं है। खाने के लिए उसके पास राशन तक नहीं है किसी तरह वह बूढी अम्मा अपना गुजर बसर कर रही है। अगर आप वहां जाकर बूढी अम्मा के घर में कुछ राशन दान कर  पाएं तो आपकी समस्या का निवारण मैं जरूर कर दूंगा। 

सेठजी कहतें है की बाबा जी यह बहुत छोटा सा काम है मैं कल ही जाकर बूढी अम्मा से मिलूंगा और उनको राशन दान करूँगा यह कहकर सेठजी घर को वापस आ जातें हैं और अगले दिन अपने नौकर को आज्ञा देतें हैं की जल्दी से १ क्विंटल आटा और खाने के लिए अन्य सामग्री गांव में पहुँचाना है और दूसरी गाडी से स्वयं सेठजी उसी गांव में पहुंचते हैं। सबसे आखिर की झोपडी पर पहुंच कर सेठजी दरवाजा खटखटाते हैं और दरवाज़ा खुलता है वह बुजुर्ग महिला बाहर आती है।

सेठजी उस बुजुर्ग महिला को अपना परिचय बतातें हैं और कहतें हैं की माता जी मैं आपके लिए १ क्विंटल आटा और कुछ अन्य सामग्री भी लाया हूँ उसको अपने पास रख लीजिये क्योंकि मुझे मालूम हुआ है की आपके पास खाने के लिए राशन नहीं है और सेठजी यह भी कहतें है की अगर आपको इसके अलावा किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे ज़रूर बताएं मैं आपके लिए सभी व्यवस्थाएं कर दूंगा। 

वह बुजुर्ग महिला सेठजी को देखती है और मुस्करा कर कहती है की आज का भोजन तो मैंने कर लिया है इसलिए मुझे इसकी ज़रूरत नहीं है। सेठजी फिर कहतें हैं माता जी यह राशन आपकी कई दिनों तक का भोजन प्रबंध कर देगा और आपको भोजन प्रबंध करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। वह बुजुर्ग महिला फिर भी मना कर देती है। सेठजी बड़े असमंजस स्थिति में पड़ जातें हैं क्योंकि सेठजी को तो केवल राशन दान करना होता है इसलिए वह बुजुर्ग महिला से फिर कहतें है की माता जी पूरा न सही आधा राशन ही रख लो। वह बुजुर्ग महिला फिर भी मना कर देती है। 

क्योंकि सेठजी को तो किसी तरह राशन देना है इसलिए वह बुजुर्ग महिला से प्राथर्ना करतें हैं की माता जी मैं बहुत दूर से आपके लिए यह राशन लाया हूँ इसमें से आप कुछ दिनों का ही रख लो। बुजुर्ग महिला फिर भी राशन लेने से इंकार कर देती है। सेठजी फिर कहतें है की माता जी अच्छा आप आधा किलो ही रख लो  कल के लिए कुछ काम आएगा। बुजुर्ग महिला फिर से मना कर देती है। थक हार कर सेठजी पूछतें हैं की माता जी ऐसा क्या कारण है जो आप मुझसे कल के लिए भी राशन नहीं ले रहीं हैं। 

बुजुर्ग महिला कहती है की आज के भोजन का प्रबंध ऊपर वाले ने कर दिया है उसी तरह वह कल का भी भोजन का प्रबंध कर ही देगा। मुझे कल के भोजन के लिए आज क्यों परेशान होना चाहिए ?

अब सेठजी को सब बात समझ में आ जाती है की क्यों बाबा जी ने मुझे यहाँ पर भेजा है ? सेठजी को अपनी समस्या का हल भी मिल जाता है की आने वाली पीढ़ी के बारे में आज से क्यों परेशान होना जैसे मेरे लिए ऊपर वाले ने सात पीढ़ियों के खाने का प्रबंध किया है उसी प्रकार आठवीं पीढ़ी का भी प्रबंध हो ही जायेगा। 

इस कहानी का moral story hindi मतलब बहुत सीधा सा है की हम सब लोग अपने आने वाले कल के लिए परेशान होते हैं और आज को महत्वपूर्ण नहीं मानते। इस तरह हम लोग पूरा जीवन सिर्फ कल को अच्छा करने में लगा देतें हैं। जबकि  होना यह चाहिए की वर्तमान या आज का समय महत्वपूर्ण है और हम सबको इसी पर ध्यान देना चाहिए और ख़ुशी पूर्वक आज को धन्यवाद करना चाहिए। इसलिए कल की चिंता करने की बजाय आज को चिंतामुक्त जीना चाहिए। 

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धन्यवाद !

Moral Story Hindi - मोरल स्टोरी हिंदी ? Moral Story Hindi - मोरल स्टोरी हिंदी ? Reviewed by Amit Nishad on January 06, 2020 Rating: 5

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