KYC Full Form क्या है? What is KYC in Hindi?

KYC Full Form क्या है? What is KYC in Hindi?

KYC Full Form: आपने देखा होगा कि बैंक, फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन अक्सर आपसे KYC अपडेट करने को कहते हैं। KYC बैंकिंग और फाइनेंस का एक खास टर्म है। इसका प्रयोग व्यक्ति की पहचान और उसके पते को सत्यापित करने के लिए किया जाता है। KYC के लिए varify Documents में सरकार ने 6 तरह के Document को शामिल किया है।

What is KYC in Hindi?

जब भी बैंक KYC अपडेट करने के लिए ग्राहक से Document मंगाए तो व्यक्ति की पहचान के लिए इन्हीं 6 Document में से जरूरी Documents बैंक को देने होते हैं। ताकि व्यक्ति की पहचान और उसके पते को सत्यापित किया जा सके।

अभी तक मैंने आप को KYC अपडेट करने को और व्यक्ति की पहचान और उसके पते (एड्रेस) को सत्यापित करने के लिए बताया। अब मैं आपको उन 6 दस्तावेजों के बारे में विस्तार में बताऊंगा।

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KYC Documents Type

  • Passport
  • Driving License
  • Voter Card
  • Pan Card
  • UIDAI Card –
  • NRGA Card

इनमें से कोई एक document अपनी पहचान को सत्यापित करने के लिए देना जरूरी होता है। आपको बता दें कि बैंक अकाउंट खोलने, म्युचुअल फंड अकाउंट खोलने, बैंक लॉकर खोलने, ऑनलाइन म्यूच्यूअल फंड्स खरीदने, और सोने में निवेश करते समय KYC अनिवार्य है। अक्सर व्यक्ति अपनी KYC अपडेट कराने को गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन यह बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए बहुत जरूरी है।

जिससे व्यक्ति की पहचान और घर के पते की सत्यता की जांच हो जाती है। ताकि कोई धोखाधड़ी और जालसाजी ना हो पाए, और अगर हो तो उसकी जांच में आसानी हो।

आप लोगों को भी मेरी यही राय है कि अपनी KYC टाइम टाइम पर अपडेट कराते रहें। ताकि जालसाजी और धोखाधड़ी से बच सकें।

KYC Full Form in Hindi क्या है?

KYC full form का मतलब now your customer है और हिंदी में “अपने ग्राहक को जानिए” कहते हैं। बैंक तथा वित्तीय कंपनी इस फॉर्म को बनवा कर इसके साथ कुछ पहचान के प्रमाण भी लेती है। जिसके जरिए वे अपने व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करते हैं। KYC अपने व्यक्ति की पुष्टि की पहचान के लिए एक व्यापार की प्रक्रिया है। भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा बैंकों के लिए व्यक्ति को घर से KYC बनवाना अनिवार्य किया गया है।

इसी को अगर आसान भाषा में कहा जाए तो ऐसे महत्वपूर्ण document जिसे वित्तीय संस्था जब किसी व्यक्ति को कोई वित्तीय सेवा देती है, तो व्यक्ति की पहचान सत्यापित करने के लिए भरवाती है। उसे KYC कहते हैं। KYC बैंकिंग प्रक्रियाओं का अनिवार्य और महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये धोखा धड़ी वाले लेनदेन के जोखिम को कम करता है।

KYC क्यों करना चाहिए?

जब आप अपना एक KYC (Know your customer) करवा लेते हैं। तो आप बैंक को अपनी पहचान पता और वित्तीय हिस्ट्री के बारे में जानकारी देते हैं। इससे बैंक को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है, कि इसमें निवेश किया गया पैसा अवैध गतिविधियों के लिए नहीं है।

KYC कितने प्रकार की होता है?

KYC दो प्रकार की होती है।

  1. UIDAI Based KYC – (आधार-आधारित केवाईसी)
  2. In-Person (IPV) KYC – (इन-पर्सन-वेरीफिकेशन)

UIDAI KYC

आधार-आधारित KYC व्यक्ति को अपनी आधार जानकारी ऑनलाइन देखकर KYC करने की अनुमति देता है। हालांकि उसे केवल हर वित्त वर्ष ₹50000 में निवेश करने की अनुमति है। यदि हर साल एक विशिष्ट फंड में अधिक निवेश करना चाहता है। तो उन्हें in-person वेरिफिकेशन करवाना होगा ग्राहक in-person वेरिफिकेशन के लिए फंड हाउस ऑफिस या केआरए KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसी कियोस्क पर जा सकता है।

कुछ म्यूच्यूअल फंड हाउस को वीडियो कॉल के माध्यम से आपको अपने मूल पहचान और पते का प्रमाण दिखाना होता है। एक बार पूरा होने पर व्यक्ति ₹50000 से अधिक का निवेश कर सकता है।

Conclusion

KYC बैंक और कंपनी के लिए तो जरूरी है ही, साथ ही यह आपके लिए भी उतना ही जरूरी है। यह इसलिए क्योंकि यदि भविष्य में आप के नाम से कोई और व्यक्ति जालसाजी करता है, तो वह पकड़ा जा सकता है KYC प्रक्रिया में आप अपने सहयोग अवश्य प्रदान करें यह आपका कर्तव्य है। और जिम्मेदारी भी। इस आर्टिकल में हमने आपको KYC Kya hai, KYC full form, What is KYC in Hindi, KYC कैसे करना चाहिए और KYC कितने प्रकार की होती है, बताया है। मैं उम्मीद करता हूं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा।

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