NRC – राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, National Register of Citizens !

NRC – राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, National Register of Citizens !


दोस्तों इन दिनों भारत में प्रत्येक जगह पर NRC Full Form ‘The National Register of Citizenship’ को लेकर चर्चा जोरों पर है। भारत के अनेकों राज्यों में NRC Hindi को लेकर विरोध प्रदर्शन होता रहा है। सबसे पहले असम राज्य में NRC को लागू किया गया है जो वर्ष 2013 में शुरू किया गया था।
 

 
भारत देश के गृह मंत्री अमित शाह ने शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा में स्पष्ट रूप से कहा है की भारत में अवैध रूप से रहने वालों की पहचान की जायेगी जिसके लिए भारत के सभी राज्यों में NRC को लागू किया जाएगा एवं भारत के सभी धर्मों और संप्रदाय के लोगों को इसमें शामिल किया जाएगा। 
 
असम राज्य में NRC को लेकर सरकार की तरफ से जुलाई वर्ष 2018 में आये अंतिम ड्राफ्ट में लगभग 40.07 लाख लोगों के नाम शामिल नहीं किये गए हैं। असम में 3.29 करोड़ लोगों ने NRC में शामिल होने के लिए आवेदन किया था और अंतिम सूची आने पर 2.89 करोड़ लोगों को ही NRC में शामिल किया गया है। जिसकी वजह से पूरे भारत में NRC को लेकर संसद से सड़क तक बहस होने लगी है। 
 
लगातार NRC की प्रक्रिया चलने के बाद 31अगस्त वर्ष 2019 को असम राज्य के नागरिकों का अंतरिम संशोधित आंकड़ा आया जिसमे लगभग 19,6657 लोगों को गैरकानूनी नागरिक करार दिया गया है। 
 
सबसे पहले आपको यह समझना होगा की NRC क्या है और सरकार इसे पूरे देश में क्यों लागू करना चाहती है ? भारत में NRC को लेकर कड़ा विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है ?
 

NRC क्या है ?

NRC का फुलफॉर्म ‘National Register of Citizens’ है। NRC हिंदी में ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ कहा जाता हैं। 

 
सबसे पहले असम राज्य में NRC को लागू किया गया है। वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शुरू किया गया था। इसके लिए आपसे कुछ प्रमुख बिंदुओं को साझा करना चाहूंगा जिससे आपको और अच्छी तरह से समझ पाए की असम राज्य को NRC के लिए क्यों चुना गया। 
 
NRC के अंतर्गत सभी भारत में रहने वालों का रजिस्टर तैयार किया जाता है जिसे हम लोग राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर कहतें हैं। 
 
सबसे पहले NRC को भारत की आज़ादी मिलने के बाद वर्ष 1951 में भारत की जनगणना के बाद तैयार किया गया था और सिटीजनशिप एक्ट 1955 को लागू किया गया था जो वर्ष 2003 में अमेंडमेंट हुआ था। 
  
NRC लागू होने के बाद असम में उन सभी भारतियों को शामिल किया गया है जो 25 March वर्ष 1971 से पहले भारत में रहने के सम्बंधित डॉक्यूमेंट को सरकार के दिशा निर्देश के अनुसार दिखाता है। 
 
NRC को उन्ही राज्यों में मुख्य रूप से लागू किया जाता है जहाँ से अन्य देश के नागरिक भारत की राज्य सीमाओं के जरिये चोरी छिपे प्रवेश करतें हैं। इस NRC के जरिये उन सभी लोगों की जानकारी प्राप्त होती है और NRC रिपोर्ट बनाई जाती है और इससे यह पता हो जाता है की कौन भारतीय है और कौन भारतीय नहीं है। इस NRC रिपोर्ट से उन सभी अवैध लोगों को वापस उनके देश भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की जाती है। 

NRC Assam में सबसे पहले क्यों लागू किया गया ?

यह बात भारत पाकिस्तान के बटवारे के समय से शुरू होती है क्योंकि जब भारत पकिस्तान ने अपने अपने देश की सीमाओं को बनाया गया जिसके अंतर्गत पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान को मिलाकर समूचे पाकिस्तान का निर्माण हुआ। पश्चिमी पाकिस्तान को अब हम लोग पाकिस्तान कहतें हैं। जबकि पूर्वी पकिस्तान आज के समय में बांग्लादेश बन गया है।

पूर्वी पाकिस्तान का जब निर्माण हुआ तो यह असम और बंगाल बॉर्डर के कुछ हिस्सों को लेकर बना हुआ था और जब वर्ष 1971 युद्ध के बाद बांग्लादेश बना तो उसमे बहुत लोग असम राज्य में स्वतंत्रता पूर्वक आवागमन करते रहे क्योंकि असम राज्य में कुछ लोगों की ज़मीन और कारोबार मौजूद थे और वह सभी बांग्लादेश के सीमा में रहते थे जो 1947 में बने पूर्वी पाकिस्तान के नागरिक थे। इसके अलावा रोज़गार की तलाश में भी बांग्लादेशी नागरिक असम राज्य से आते रहतें हैं और धीरे धीरे भारत में रहने लगे जिसकी वजह से असम राज्य में जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ने लगी। 
 
1980 में आल असम स्टूडेंट यूनियन (AASHU), संगठन और असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों ने इसका कड़ा विरोध किया जाने लगा और साथ में यह भी बताया की बांग्लादेशी गैरकानूनी लोगों के आने की वजह से उनके रोज़गार और अन्य कामों को छिना जाने लगा है और अपराधों की संख्या में बढ़ोत्तरी भी हुयी है जिसकी वजह से असम में हिंसा और अशान्ति बनी रहती थी। लगभग 6 वर्षों तक संघर्ष करने के बाद 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। 

 

NRC assam समझौते के मुख्य बिंदु

 

15 अगस्त 1985 को भारत सरकार और असम राज्य के बीच समझौता हस्ताक्षर किया गया था और इसमें प्रमुख रूप से आल असम स्टूडेंट यूनियन, अन्य असम संगठन को भी साथ लिया गया था। 
 
इस nrc assam समझौते में पूर्वी पाकिस्तान बनने के समय वर्ष 1961 से वर्ष 1971 (बांग्लादेश बनने से पहले) के बीच असम में आये हुए सभी लोगों को भारत की नागरिकता का प्रावधान किया गया लेकिन उनको मताधिकार से वंचित रखा गया था। 

 

असम राज्य के विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज मुहैया कराया जाना रखा गया। 

 

इस समझौते के अंतर्गत 24 मार्च 1971 के बाद nrc assam में प्रवेश करने वाले उन सभी हिन्दू, मुस्लिम और अन्य धर्म के लोगों की पहचान की जानी थी और उनको पहचान करने के बाद असम राज्य से वापस भेजने का लक्ष्य रखा गया था। 
 
असम समझौता के अनुसार मतदाता सूची को संशोधित किया जाना था। 

 

असमिया भाषा से सम्बन्ध रखने वाले लोगों को सामाजिक और सांस्कृतिक तरीके से बढ़ावा दिया जाय और उनकी पहचान होने पर सुरक्षा और विशेष कानून भी बनाया जाना प्रमुख थे। 

 

NRC assam में होने पर असम की नागरिकता किसे मिलेगी ?

 

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है की जिस तरह से असम राज्य में लगभग 2 मिलियन लोगों को गैरकानूनी बताया गया है उसकी वजह से यह विवाद और ज़्यादा बढ़ गया है। 

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यदि कोई nrc assam में होने पर असम नागरिक को 25 मार्च 1971 से पहले रहने का प्रमाण हो या उनके पूर्वजों का दिए गए डेट से पहले का मतदाता सूची में नाम हो। तभी आपको भारत की नागरिकता मिलेगी अथवा आपको नागरिकता सूची से बाहर कर दिया जाएगा। 

 

यह बात भी सही है की 1951 के बाद अभी तक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को अपडेट नहीं किया गया था जबकि nrc assam का फैसला वर्ष 2005 में लिया गया था लेकिन असम समझौते के तहत 25 मार्च 1971 से पहले असम में ग़ैरकानूनी तरीके से प्रवेश किये हुए लोगों का नाम भी नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स में जोड़ने को लेकर यह विवाद का कारण बन गया और मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुँच गया था।
 
जिसको सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में साफ़ तौर पर कहा की 25 मार्च 1971 से पहले प्रवेश कर आये हुए लोगों को इस NRC लिस्ट से बाहर रखा जाएगा। 

 

अब सवाल यह है की अगर असम राज्य का NRC फार्मूला पूरे भारत के लिए माना जाय तो लोगों को किस तरह के डाक्यूमेंट्स को जमा करना होगा। इसको समझने के लिए दो तरह की लिस्ट को देखना पड़ेगा जिसको लिस्ट A और लिस्ट B में रखा गया है।
 
पहली लिस्ट A में 25 मार्च 1971 से पहले के दस्तावेज़ों को जमा करना होता है यदि आपके पास इनमे से कुछ भी नहीं होता है तो आपको लिस्ट B में जिसमे की आपको अपनी और अपने पूर्वज से सम्बन्ध स्थापित रखने सम्बंधित डाक्यूमेंट्स को जमा करना होगा। 

 

लिस्ट A में शामिल डॉक्युमेंट्स

  • नागरिक के पास 25 मार्च 1971 से पहले का मतदाता सूची में नाम मौजूद होना चाहिए
  • वर्ष 1951 का राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर में नाम होना चाहिए
  • नागरिकता प्रमाण पत्र सम्बंधित दस्तावेज़
  • ज़मीन के मालिकाना हक़ सम्बंधित डॉक्युमेंट्स
  • यदि आप किराये पर रहतें हैं तो किरायेदारी रशीद का होना 
  • स्थायी निवास प्रमाण पत्र
  • शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र
  • किसी सरकारी अथवा सरकारी संस्था द्वारा जारी लाइसेंस या प्रमाण पत्र
  • सरकार अथवा सरकारी उपक्रम के नियुक्ति का प्रमाण पत्र
  • बैंक अकाउंट कॉपी
  • पोस्ट ऑफिस अकाउंट कॉपी
  • जन्म प्रमाण पत्र
  • किसी यूनिवर्सिटी अथवा राज्य शिक्षा बोर्ड का प्रमाण पत्र
  • अदालत के आदेश की कॉपी
  • पासपोर्ट की कॉपी
  • कोई भी बीमा पालिसी की कॉपी
 

लिस्ट B में शामिल डॉक्युमेंट्स

  • जन्म प्रमाण पत्र
  • ज़मीन के दस्तावेज़
  • यूनिवर्सिटी या स्कूल बोर्ड सम्बंधित कागज़
  • बैंक अकाउंट
  • बीमा रिकॉर्ड की कॉपी
  • पोस्ट ऑफिस रिकॉर्ड कॉपी
  • राशन कार्ड की कॉपी
  • मतदाता सूची में नाम की कॉपी
  • कानूनी रूप से स्वीकार्य कोई दस्तावेज़ की कॉपी
  • यदि कोई महिला विवाहित है तो सर्कल अधिकारी अथवा ग्राम पंचायत सचिव का प्रमाण पत्र होना चाहिए

अब सवाल यह है की यदि कोई भी प्रमाणिकता नहीं हो पाएगी तो क्या होगा आइये इसको भी समझ लेते हैं। भारत सरकार में मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से यह स्पष्ट कहा गया है की NRC को 2022 तक लागू किया जाएगा। यदि कोई भी व्यक्ति अपनी नागरिकता सम्बंधित कागज़ देने में असमर्थ रहता है तो उसको फॉरेन ट्रिब्यूनल कोर्ट में अपनी नागरिकता को सिद्ध करने का अवसर प्रदान किया जाएगा। 

 
अगर कोई भी फॉरेन ट्रिब्यूनल कोर्ट में भी नागरिकता सिद्ध करने में फेल हो जाता है तो उसको विदेशी घुसपैठिया घोषित कर दिया जाएगा और उसको गिरफ्तार कर लिया जायेगा और आपके प्रॉपर्टी को भी ज़ब्त कर लिया जाएगा। 
 
गिरफ्तार और अवैध नागरिक पाए जाने पर उसको भारत सरकार के कड़े निगरानी में बने डिटेंशन सेण्टर में रखा जाएगा जहाँ पर खाना पीना रहना मुफ्त में दिया जाएगा। उसको बाहर रहने खाने और घूमने की कोई स्वतंत्रंता नहीं होगी। 
 
अभी तक nrc assam में प्रक्रिया चल रही है जिसमें जुलाई 2019 तक जो रिपोर्ट सामने आई है उससे पता चलता है की 1,17,264 लोगों को विदेशी नागरिक घोषित कर दिया गया है और इसमें लगभग 1145 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
 
मुझे पर्सनल तौर पर nrc सम्बंधित जानकारी को साझा किया है जिससे किसी तरह की कोई भ्रान्ति नहीं फैले एवं आपसे निवेदन है की किसी के बहकावे में नहीं आएं अपना ख्याल रखें क्योंकि देश को आपकी जरूरत है और यह देश हमारा है कोई भी आपको ज़बरदस्ती नहीं निकल सकता है।
 
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धन्यवाद !
जय हिन्द
 

 


 

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